राजस्थान की रजत बूँदें – हिंदी पाठ योजना कक्षा 11

राजस्थान की रजत बूँदें – हिंदी पाठ योजना कक्षा 11

संक्षिप्त विवरण (Brief Description)

Sr. No.HeadingsDetails
1पाठ योजना प्रकार (Lesson Plan Type)दैनिक पाठ योजना (Daily Lesson Plan)
2विषय (Subject) हिंदी (Hindi)
3उपविषय (Sub-Subject)गद्य (Gadya)
4प्रकरण (Topic)राजस्थान की रजत बूँदें (Rajasthan Ki Rajat Boonde)
5कक्षा (Class)11th
6समयावधि (Time Duration)35 Minute
7उपयोगी (Useful for)B.ed, Deled, BSTC, BTC, Nios Deled

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका Lesson Plan World पर | आज हमने कक्षा 11 (Class 11) की हिंदी विषय की वितान से पाठ 2 की पाठ योजना शेयर की है | अगर आप कक्षा 11 (Class 11) के लिए हिंदी पाठ योजना (Hindi Path Yojna) खोज रहे थे तो अब आपकी तलाश पूरी हो चुकी है क्योंकि आज हम आपके लिए कक्षा 11 के पाठ 2 से हिंदी की पाठ योजना राजस्थान की रजत बूँदें (Rajasthan Ki Rajat Boonde) लेकर आये है | आपको बता दे कि यह कक्षा 11 की हिंदी पाठ योजना गद्य भाग की है |

 

सबसे पहले हम शिक्षण उद्देश्य की बात करेंगे की जब हम राजस्थान की रजत बूँदें (Rajasthan Ki Rajat Boonde) कक्षा 11 की हिंदी पाठ योजना का शिक्षण कराएँगे तो हमे किन-किन शिक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करना है |

शिक्षण-उद्देश्य :-

1. ज्ञानात्मक –

  • छात्रों को देश की भौगोलिक स्थिति तथा जलवायु की जानकारी देना।
  • मनुष्य-मात्र के स्वभाव एवं व्यवहार की जानकारी देना।
  • अपने क्षेत्र की जल की समस्या से निपटने हेतु सक्रिय भागीदारी निभाने को प्रेरित करना।
  • पाठ की विषयवस्तु को पूर्व में सुनी हुई घटना या किसी लेख से संबद्ध करना।
  • नए शब्दों के अर्थ समझकर अपने शब्द- भंडार में वृद्धि करना।
  • साहित्य के गद्य –विधा (लेख) की जानकारी देना।
  • नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करना।
  • छात्रों को एक जागरुक और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा देना।

 

2. कौशलात्मक –

  • स्वयं लेख लिखने की योग्यता का विकास करना।
  • जल संग्रह और सुरक्षा के विभिन्न उपायों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना।

 

3. बोधात्मक –

  • लेख की मुख्य विषयवस्तु को समझने का प्रयास करना।
  • रचनाकार के उद्देश्य को स्पष्ट करना।
  • लेख में आए स्मरण रखने योग्य स्थलों का चुनाव करना।
  • राजस्थान की जल-संग्रह प्रणाली तथा कार्य-शैली के बारे में अवगतहोना।

 

4. प्रयोगात्मक –

  • लेख को अपने दैनिक जीवन के संदर्भ में जोड़कर देखना।
  • लेख से मिली शिक्षाओं पर अमल करना ।
  • पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखना।

 

शिक्षण सहायक सामग्री:-

  • चाक , डस्टर आदि।
  • चार्ट, चित्र आदि के द्वारा पाठ की प्रस्तुति।

 

पूर्व ज्ञान:-

  • ‘जल ही जीवन है’ के बारे में थोड़ा ज्ञान है।
  • राजस्थानी जीवन – शैली के बारे में ज्ञान है।
  • गद्य की विधा ‘लेख’ का अल्प-बहुत ज्ञान है।
  • साहित्यिक-भाषा की थोड़ी-बहुत जानकारी है।
  • मानवीय स्वभाव की जानकारी है।

 

प्रस्तावना – प्रश्न :-

  • बच्चो! क्या आपके आसपास ऐसे स्थान हैं जहाँ जल की कमी है ?
  • क्या आप जल संग्रह और सुरक्षा की प्रणाली के बारे में जानते हैं ?
  • जल की उपलब्धता के आधार पर हमारे देश के लोगों की जीवन – शैली कैसी है और कैसी होनी चाहिए ?
  • मनुष्य की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

 

उद्देश्य कथन :- बच्चो! आज हम लेखक ‘अनुपम मिश्र’ के द्वारा रचित  प्रेरक लेख ‘राजस्थान की रजत बूँदें’ का अध्ययन करेंगे।

 

राजस्थान की रजत बूँदें – हिंदी पाठ योजना कक्षा 11 की इकाइयाँ—

यहाँ हमने हिंदी पाठ योजना को पाठ की सरलता बनाये रखने के लिए पांच खंडो में विभक्त कर दिया है |

प्रथम अन्विति— ( पसीने में तरबतर………………………दिखती नहीं है )

  • कुंई की खुदाई।
  • अंदर घुसे चेलवाँजी की तैयारी तथा ऊपर खड़े लोगों की मदद ।
  • कुंई और कुएँ की गहराई और व्यास में अंतर।
  • मरुभूमि में रेत का विस्तार।

द्वितीय अन्विति :- (ऐसे क्षेत्र में…………………..तीन रूपों में बाँटा है। )

  • रेत के नीचे खड़िेया पत्थर की पट्टी।
  • प्रकृति की अनोखी उदारता ।
  • रेत के कण औत अन्य मिट्टी के कणों का जमाव।
  • कुंई में मीठे पानी का रिसाव।
  • जल प्राप्त करने का शास्त्र।

तृतीय अन्विति :-  ( पहला रूप है…………………..चिनाई भी करते जाते हैं )

  • पानी के तीन रूप।
  • चेजो यानी चिनाई का काम।
  • रस्सी की बुनाई।

चतुर्थ अन्विति :-  ( लगभग पाँच हाथ…………………..रिवाज़ आ गया है )

  • रस्सी की कुंडलियाँ।
  • लकड़ी से चिनाई। कुंई की सफलता पर उत्सव।

पंचम अन्विति :-    ( कई जगहों पर……………….कहड़ी रहती है कुंई )

  • पहले की कुंइयाँ आज भी टिकी हुई।
  • कुंई का मुँह छोटा रखने के तीन कारण।
  • कुंई को ढँककर रखा जाना। कुंई के ऊपर की घिरनी। निजी और सार्वजनिक कुंइयाँ। ग्राम समाज का कुंइयों पर अंकुश।
  • राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में कुंईयाँ।

इन्हें भी देखे:-

 

शिक्षण विधि :-

क्रमांकअध्यापक-क्रियाछात्र-क्रिया
1.पाठ का सारांश :-

‘राजस्थान की रजत बूँदें’ अनुपम मिश्र की एक प्रसिद्ध लेख है। यह रचना एक राज्य विशेष राजस्थान की जल समस्या का समाधान मात्र नहीं है। यह ज़मीन की अतल गहराइयों में जीवन की पहचान है।

यह रचना धीरे-धीरे भाषा की ऐसी दुनिया में ले जाती है जो कविता नहीं है, कहानी नहीं है, पर पानी की हर आहट की कलात्मक अभिव्यक्ति है। भाषा में संगीतमय गद्य की पहचान है। इस पहचान से विद्यार्थियों का ताल मिले, यह वितान की उपलब्धि होगी।

 

लेख को ध्यानपूर्वक सुनना और समझने का प्रयास करना। देश के कुछ राज्यों के जल संकट पर अपने विचार प्रस्तुत करना।
2. लेखक-परिचय :-

जन्म :   सन् १९४८, महाराष्ट्र के वर्धा ज़िले में।

पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर बीस पुस्तकों का लेक्ल्हन जिनमें आज भी खरे हैं तालाब और राजस्थान की रजत बूँदें विशेष चर्चित। पर्यावरण संबंधी कई आंदोलनों से न केवल घनिष्ठ रूप से जुड़े रहे हैं बल्कि लोगों को जागरुक करने के लिए मुहिम भी चलाई। सन् १९७७ से गाँधी शांति प्रतिष्ठान के पर्यावरण कक्ष से संबद्ध।

 

लेखक के बारे में आवश्यक जानकारियाँ अपनी अभ्यास –पुस्तिका में लिखना।
3.शिक्षक के द्वारा पाठ का उच्च स्वर में पठन करना।उच्चारण एवं पठन – शैली को ध्यान से सुनना।
4.पाठ के अवतरणों की व्याख्या करना।पाठ को हॄदयंगम करने की क्षमता को विकसित करने के लिए पाठ को ध्यान से सुनना। पाठ से संबधित अपनी जिज्ञासाओं का निराकरण करना।
5.कठिन शब्दों के अर्थ :-

तरबतर                              – पूरी तरह गीला

उखरूँ                               –  उकड़ूँ बैठना

खींप                               –  एक प्रकार की घास जिसके रेशों से                                                        रस्सी बनाई जाती है

डगालों                             – तना या मोटी टहनियाँ

आच प्रथा                          – कुंई खोदने वालों को समान्नित किया                                          जाना

चड़स                            – चमड़े से बना पानी निकालने का पात्र

 

छात्रों द्वारा अपनी अभ्यास- पुस्तिका में लिखना।

6. छात्रों द्वारा पठित अनुच्छेदों में होने वाले उच्चारण संबधी अशुद्धियों को दूर करना।छात्रों द्वारा पठन।

 

गृहकार्य :-

  • पाठ का सही उच्चारण के साथ उच्च स्वर मेँ पठन करना।
  • पाठ के प्रश्न – अभ्यास करना।
  • लेख की प्रमुख घटनाओं की संक्षेप में सूची तैयार करना।
  • पाठ में आए कठिन शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग करना।

 

परियोजना कार्य :-

  • ‘ अनुपम मिश्र ’ की पुस्तकें पुस्तकालय आदि से संग्रह कर पढ़ना।
  • भारत में जल समस्या पर आधारित कोई लेख लिखना।
  • मशहूर हिन्दी फ़िल्म ‘ जल ’ देखना।

 

मूल्यांकन :-

निम्न विधियों से मूल्यांकन किया जाएगा :-

  • पाठ्य-पुस्तक के बोधात्मक प्रश्न—
    • राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं ? इसकी गहराई और व्यास तथा सामान्य कुओं की गहराई और व्यास में क्या अंतर होता है ?
    • कुंई निर्माण से संबंधित निम्न शब्दों के बारे में बताइए – पालरपानी, पाताल पानी, रेजाणीपानी ।
    • निजी होते हुए भी सार्वजनिक क्षेत्र में कुंइयों पर ग्राम-समाज का अंकुश लगा रहता है। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा ?
    • चेजारों के साथ गाँव समाज के व्यवहार में पहले की तुलना में आज क्या फ़र्क आया है। पाठ के आधार पर बताइए।।
  • इकाई परीक्षाएँ
  • गृह – कार्य
  • परियोजना – कार्य

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